कामना का काट कामना ही करती है,
ईश्वर, प्रकृति या एक ऊर्जा तक आपकी भक्ति या वक्तव्य तभी पहुँचता है जब आप कुछ देते हो, भीतर आपके कामना है और आपको है भी किसी ना किसी रूप में कामना है, अतः खाली भक्ति करोगे तो कामना का काट नहीं होगा, पर भरे हाथों से भक्ति होगी तो वह भरा हुआ अपने भीतर आपकी कामना को भर लेगा, और आपकी मूल भक्ति, वक्तव्य या स्वंय उस ऊर्जा, ईश्वर या प्रकृति तक पहुँच जाएगी, और आप संपन्न जिंदगी जीओगे, तब आप मूलतः भक्ति कर रहे हो। आप जिसे भी हृदय लगाओगे पर उससे पहले उस ऊर्जा को पूर्ण संपन्नता के साथ उस रूप में स्थापित करो, आप उसका ध्यान रखोगे उसकी जिंदगी बनाओगे, वो आपकी जिंदगी बनाएगा, आपके पास एक निश्चित और सीमितता है पर उसके पास "वह है,जो होता है" तो आपके पास बहुत होगा, असीमित होगा।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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