मंजिल की तलाश है
अजीब है ये मेरा अकेलापन ये अब भी खामोश है उदास है
मैं भीङ में रहता हूं मगर नहीं कोई भी मेरे कहीं आसपास है
मैं अक्सर बातें करता हूं अपनी ही खामोश
उदास परछाइयों से
गम में डूबी खामोश हवाओं से और अपनी इन तनहाइयों से
नजर आता नहीं कोई छोर कहीं भी अब
इन से निकलने का
प्यास बढ़ रही है मगर मिला नहीं कोई भी
मौका मिलने का
जिस से जुदा हो कर ये तन्हा दिल खामोश है
अब भी उदास है
कहां जाना है मालूम नहीं है मुझे आज भी
बस एक तलाश है
मेरे लबों पर फैली हुई अन्जान सी अनदेखी
एक प्यास है
बिन रुके चल रहा हूं रात-दिन अकेले ही
अनदेखी राह में
इस अन्जान सी राह में मुझ को अपनी एक
मंजिल की तलाश है
मंजिल की तलाश है
मंजिल की तलाश है।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







