🌹कला को फालतू 🌹
कोई कला को फालतू कैसे समझ सकता है..?
ये एक ऐसी चीज है जो हर किसी के पास नहीं होता,
मगर जिसके पास होता है उनका जीवन इस पर निर्भर हो जाता है,
लेकिन ऐसा क्यों होता..?
जब कोई उसे अपनाना चाहे तो
उसे अपनाने नहीं दिया जाता है,
क्या ऐसा करना उचित है..?
किसी को महसूस करना और उसे अपनी कलम से कागज़ पर उतरना,
सिर्फ लिखना नहीं होता,
उनसे जुड़ी हुई कई सारी यादें होती है,
हर किसी के दिल की बात हर कोई महसूस नहीं कर पाता,
जो कर पाता है वो अपनी कलम से कागज़ पर उतार जाता है,
कोई तो समझो कला फालतू नहीं है बल्कि किसी की जिंदगी है...।।
- सुप्रिया साहू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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