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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

कला को फालतू - सुप्रिया साहू

🌹कला को फालतू 🌹

कोई कला को फालतू कैसे समझ सकता है..?
ये एक ऐसी चीज है जो हर किसी के पास नहीं होता,
मगर जिसके पास होता है उनका जीवन इस पर निर्भर हो जाता है,
लेकिन ऐसा क्यों होता..?
जब कोई उसे अपनाना चाहे तो
उसे अपनाने नहीं दिया जाता है,
क्या ऐसा करना उचित है..?
किसी को महसूस करना और उसे अपनी कलम से कागज़ पर उतरना,
सिर्फ लिखना नहीं होता,
उनसे जुड़ी हुई कई सारी यादें होती है,
हर किसी के दिल की बात हर कोई महसूस नहीं कर पाता,
जो कर पाता है वो अपनी कलम से कागज़ पर उतार जाता है,
कोई तो समझो कला फालतू नहीं है बल्कि किसी की जिंदगी है...।।

- सुप्रिया साहू




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (7)

+

जयश्री विलास जोधंळे said

सही कहा आपने कला फालतु नही उसमे उसकी भावना छुपी होती है अगर कला को फालतु समजते है लोग तो आप उन्हे नजर अंदाज कर दिजीए

सुप्रिया साहू replied

बहुत-बहुत आभार एवं धन्यवाद मैम🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

क्या बात है।कला बिल्कुल फालतू हो ही नहीं सकती।मन की भावनाओं को कागज पर उतारना सिर्फ एक कला ही नहीं बल्कि किसी भी व्यक्ति, रचना, घटना को महसूस कर अपनी भावनाओं को कलमबद्ध करना है,जो एक कला भी है और जीवनशैली भी। कोई इसे अगर फालतू समझता है तो उसकी मर्ज़ी क्योंकि ऐसे लोग दूसरों की दिल की गहराई को नहीं समझ सकते। आपकी कविता में एक दर्द है, शिकायत है, चिढ़ है,सवाल है। सादर नमस्कार 🙏🌹🙏

सुप्रिया साहू replied

इतनी सुंदर प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार एवं धन्यवाद सर 🥰, आपकी समीक्षा पाकर मुझे और लिखने को प्रेरित करता है, अपना आशीर्वाद बनाए रखिए, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

पवन कुमार "क्षितिज" said

कला के कद्रदान ना भी मूल्य तो कला दिल को सुकून देती ही है..बढ़िया लिखा सुप्रिया जी आपने..👌👌👌👌

सुप्रिया साहू replied

प्रतिक्रिया के आपका हार्दिक धन्यवाद सर 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

पवन कुमार "क्षितिज" said

मूल्य को मिले पढ़ें...वैसे कॉमेंट्स में भी एडिट का ऑप्शन हो तो अच्छा रहे..।

सुप्रिया साहू replied

🙏🙏

रीना कुमारी प्रजापत said

कला को फालतू समझने वालों के लिए ठीक लिखा आपने.. बहुत बढ़िया

सुप्रिया साहू replied

बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद दीदू जी 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

तुलसी पटेल said

बिल्कुल सही जगह आपकी लेखनी चली है सुप्रिया जी..😇 सादर प्रणाम 🙏🏻

सुप्रिया साहू replied

इतनी प्यारी समीक्षा के लिए बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद तुलसी मैम 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

कमलकांत घिरी said

वाह बहुत ही गहरे विचार व्यक्त किए सुप्रिया जी आपने, किसी दूसरे के जज्बातों को समझना और उसे अलफाजों में पिरोना सच में किसी जादूगरी से कम नहीं नहीं होता ये कला हर किसी को नहीं आता जो इसे नहीं समझते वो हक़ीक़त में नादान ही होते होंगे जो किसी की भावनाओं की कद्र नहीं करते उनके संवेदनाओं उनकी इच्छा को नहीं समझ पाते वे लोग संवेदनहीन हैं ऐसे लोगों की बातों से अपना दिल दुखना व्यर्थ है🙏

सुप्रिया साहू replied

इन सभी बातों को समझने वाले बहुत कम लोग होते हैं सर, बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद कमल सर 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

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