जुबां पर जब कभी उसका सुहाना नाम आता है,
भरे गुलशन में भी दिल को बड़ा आराम आता है।
मुसाफ़िर थक के सो जाता है राहों में मगर अक्सर,
मकाँ तक दौड़ कर यादों का एक पैग़ाम आता है।
सँभल कर चलना पड़ता है वफ़ा की तंग गलियों में,
यहाँ हर मोड़ पर कोई नया इल्ज़ाम आता है।
उन्हें कहना कि आँखें खोल कर देख लें दुनिया,
यहाँ सूरज भी ढलने के लिए हर शाम आता है।
ग़ज़ल का रूप लेकर दिल का हर इक दर्द महफ़िल में,
मियाँ 'ललित' का बनकर आज आल्हादाम आता है।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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