नहीं मेरा किरदार ऐसा नहीं,
मैं लबों पे झूठ सजाया न करता,
अदब दे रहा हूं तो रख लो मुफ़्त समझकर,
वरना मैं यूं ही अपने लफ़्ज़ ज़ाया न करता,
ये आलम-ए-सुख़न नहीं, सच्चाई है, ज़रा सुनो गौर से,
मैं हर महफ़िल में इतनी हक़ीकत बताया न करता..!
@कमलकांत घिरी ✍️


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







