यह ज़रूर है जो सामान्यतः नहीं होता,
यह जरूरी भी है,
जब जरूरत हो तब,
बाकी यही सामान्य है,
जो सामान्य है वो है,
उसका एक अंश जरूरी है जरूरत है,
बाकी उसका सामान्य होना ही,
सबके लिए जरूरी है,
जरूरी वो सबके लिए नहीं भी ना हो,
असर तो सामान्य से ही होगा,
धीरे धीरे मिल जाना,
पर प्रभाव ज़रूरत के लिए जरूरी से ही होगा,
जो सामान्य एक अंश प्रकट हुआ,
निजता एक गहरी खाई है,
उसकी आवश्यकता को पूरा करना,
यहां नैतिकता ठीक नहीं स्वार्थ जरूरी है,
पर सामान्यतः सार्वजनिकता में ना किसी से जीतो,
ना जीत देखो,
यहां निजता के स्वार्थ नहीं,
तुम स्वयं हो। ।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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