लगता हैं कि उसको मुझसें पहले सा वो प्यार नहीं रहा
या तो उम्मीदें बढ़ गई या मेरा प्यार असरदार नहीं रहा
पहले सी वो फ़िकर नहीं मेरे खो जाने का भी ग़म नहीं
मुझमें में ही कमी थी इसीलिए उसका इज़हार नहीं रहा
कब कहा मैंने मुहब्बत में चाँद-तारे ले आए कहीं सें भी
ये वक़्त माँगा था क्या दिल इतना भी हक़दार नहीं रहा
महबूब रूठा हों तो क्या ख़ुद भी रूठ जाना चाहिए था
वो मनाना ही भूल गया अब पहले सा इकरार नहीं रहा
कृष्णा अब यूँ लग रहा, हमकों तो मर जाना चाहिए था
क्यूंकि उम्मीद-ए-आस न रही ये दिल गुलज़ार नहीं रहा
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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