ऐ उड़ने वाले गगन के पंछी
दिशा दिशाएं बता रही है
जमीं ही होगी तुम्हारी मंजिल
तुम्हें अभी तक पता नहीं है।
अति अनंत है गगन सीमाएं
तू अपनी पंखों पे न घमंड कर
बिखर जाएंगी अहम के पंखें
तुम्हें अभी तक पता नहीं है।
चमन चमन को रंगाने वाले
सुमन, सुगंधी फैलाने वाले
वजूद अपना बचा न सकते
तुम्हें अभी तक पता नहीं है।
जगत को जीता बना सिकंदर
उमर जवानी में प्राण त्यागा
भुजा की ताकत काम न आया
तुम्हें अभी तक पता नहीं है।
जो अपने दम पर बहुत कमाया
नहीं बनेंगे वो तेरा साया
मिलेगी सबको दो गज की मिट्टी
तुम्हें अभी तक पता नहीं है।
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







