जयति जय! जय जय जय! जयति मातृभूमि!!
रग रग में दौड़ रही रक्त में उबाल है
रोम रोम मिट्टी से सनी बेमिसाल है
तेजोमय सूर्य सा लाल तिलक भाल है
भरी है भुजाओं में शौर्य मालामाल है
गोद में तुम्हारी हो, वीरगति मातृभूमि!
जयति जय!जय जय जय! जयति मातृभूमि!
युवा युवा कंठ में केसरी दहाड़ है
पांव में फौलाद है रौंदने पहाड़ है
दृष्टि है समंद सी प्रखर प्रखर प्रगाढ़ है
इरादे चट्टान सी और हस्तिनी चिंघाड़ है
तुम पर ही मिट जाएं रति-रति मातृभूमि!!
जयति जय!जय जय जय!जयति मातृभूमि!!
सीने में तोप का सहेंगे प्रहार हम
मिट ही जाएं भले ही मानेंगे न हार हम
बर्फीली तूफान से, खाएं न खार हम
दुश्मनों का क्षण क्षण, करेंगे दुश्वार हम
शून्य हूं क्या दूं,मैं मंदमति, मातृभूमि!!
जयति जय!जय जय जय! जयति मातृभूमि!!
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







