एक राजा है,
जिसने कानून बनाया,
किसके लिए,
उसकी जनता के लिए,
कानून क्या था,
कि जनता को बंधन में रखो,
क्यूँ,
क्यूंकि राजा सस्ता नशा करता है,
उसे जनता नहीं गुलाम पसंद है,
उसके लिए जनता निरर्थक है,
वही सबकुछ है,
जनता कुछ नहीं,
जनता से जनता लड़कर,
उस राजा को मजबूत बनाती है,
उस राजा ने जनता को भ्रमित किया,
और जनता के धन से खुद के चेहरे को साफ़ किया,
जनता ने उसको मालामाल किया,
खुद कंगाल होकर,
ऐसे राजा से देश आगे नहीं बढ़ता है,
सिर्फ रुपया गिरता है।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







