जहन्नुम (नज़्म)
अब जहन्नुम का खौफ क्या सताएगा
जो जिया है वो जहन्नुम से बद्तर ही है
जो पढ़ा है जहन्नुम के बारे में यहां
लगता है वो इस दुनिया से बेहतर ही है
यहां हमने जो ज़ख्म खाए हैं उससे
ज़क़्क़ूम जहन्नुम के तो बेहतर होंगे
जिस आग में जल रहे हैं एक मुद्दत से
खौलते आब कहीं इससे तो बेहतर होंगे
(ज़क़्क़ूम: कांटेदार ज़हरीली झाड़ियां)
कम से कम ये तो ख़बर होगी कि जहन्नुम में हैं
यहां ईद में लगता है मोहर्रम में हैं
वहां न ईद न मोहर्रम का तमाशा होगा
हम जहन्नुम में हैं इसका तो हौसला होगा
जो भी बिच्छू हैं, सांप हैं वहां
उनका अब क्या ही ज़हर होगा
जो ज़हर मुझको अपनों ने दिया
उसका अपना ही एक असर होगा
जो इस ज़हर को पी चुका है फिर
उसे उसका डर ही क्या सताएगा
जिसने जी है पूरी ज़िंदगी यहां
फिर वो जाकर क़रार वहां पाएगा
हाय जहन्नुम में आग के जूते
पहनकर जिनको हम आग में कूदे
यहां तो आग है मोहब्बत की
यहां तो आग है हैबत की
(हैबत: आतंक/दहशत)
कम से कम वहां हम आग में जलकर
अपने किये की सज़ा पाएंगे
लेकिन जिस आग में जल रहे हैं यहां
आखिर कब इससे निजात पाएंगे।
अनमोल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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