हमने ईश्वर को
कभी देखा नहीं है,पर
महसूस किया है -
नवशिशु की नवरूदन सुन
वात्सल्य से सराबोर हो
अनंत, अनभिज्ञ, अलौकिक
निश्छल निर्मल खुशी
ममता की नयन गघरी से
जब छलक छलक जाती है,तब
असीम दर्द से टूटी हुई,पर
मुस्कराती मां के चेहरे पर,
हमने ईश्वर को
महसूस किया है -
हमारी रग रग में,रोम रोम में,
हर सांस में,हर धड़कन में
धमनियों में, शिराओं में
हरेक इंद्रियों में,रक्त की बूंद बूंद में,
तन-मन के कण कण में
नव ऊर्जा संचारित करने
उदयाचल से लंबी यात्रा कर
हमारी ओर आती हुई
सूरज की सुनहरी किरणों में,
हमने ईश्वर को
महसूस किया है -
लंबे समय के लिए
हरियाली को, आमंत्रित करती
किसलय की मुस्कान में,
मन को शीतलाती
पूर्णिमा की चांदनी में,
समीर की रागिनी में,
अग्नि की मीठी तपन में,
आकाश की रिक्तता में ,
मृदा की सुरभि में,
अंबु की अमियता में।।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







