बादल कुछ यों बरस कर गये।
दो किनारे अलग-थलग पड गये।।
अब जिसको तैरना नही आता।
उसके मिलने जुलने के दिन गये।।
इंतजार रहेगा बाढ़ के घटने का।
प्रेम जताने के 'उपदेश' दिन गये।।
- उपदेश कुमार शाक्यवार 'उपदेश'
गाजियाबाद

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
बादल कुछ यों बरस कर गये।
दो किनारे अलग-थलग पड गये।।
अब जिसको तैरना नही आता।
उसके मिलने जुलने के दिन गये।।
इंतजार रहेगा बाढ़ के घटने का।
प्रेम जताने के 'उपदेश' दिन गये।।
- उपदेश कुमार शाक्यवार 'उपदेश'
गाजियाबाद
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