जो कभी इंतजार करता था मेरे आने का,
वो आज मुझे देखता नहीं है।
जिसे मेरे नाम लेने से सकून मिला,
वो आज हमसे कुछ भी पूछता नहीं है।
प्यार को नफरत में आजमाने के
सबसे बड़े खरीदार बन बैठे है हम आज
वो मेरे होने का दावा करती है
पर मेरी शकल देखती नहीं है।।
उसे शक है खुद पर,
खुद के भरोसे पर,
अगर मिले कही किसी मोड़ पर,
मैं बिखर न जाऊं उसे देखकर
उसने मेरी गालियां छोड़ दी ये सोचकर,
मैं जाता हु रोज उसके मोड़ पर,
उसे देखता हु हर रोज किसी न किसी मोड़ पर,
मनाते है हम दोनों हर रोज हर मोड़ पर,
हम मिले किसी दिन किसी मोड़ पर,
And continue
--#Seth Kundan


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







