हम अदबी लोग लोगों क़ो मगरूर नज़र आते हैं
जाने क्यूँ हममे इनको इतने कसूर नज़र आते हैं
फ़क़त हंसी पर ना जा, आँखें अश्क़ो से भीगी हैं
घोर से देख हम अंदर से चकनाचूर नज़र आते हैं
क्या बेरुख़ लहज़ा,पत्थरी दिल सिर्फ मेरे लिए हैं
आप तो सबको जानाँ बड़े दिलदार नज़र आते हैं
लोग कहते है इश्क़ ने मुझको कहीं का नहीं रखा
क्या हम आपको भी ज़हनी बीमार नज़र आते हैं
मासूक ख़ाक हो जाये तो ज़हनी तौर पर मुर्दा हैं
इश्क़ में दिली दोरे लोगो क़ो फतूर नज़र आते हैं
उसके झूठे दिलासे इश्क़ में ठन्डे छिंटे से लगते हैं
कृष्णा के दिल में तेरे दिलासे बेदार नज़र आते हैं...
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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