दिल और जहन में बेवजह हो रही तकरार क्यूँ
बेबस बेचारी जान पे लटकी सदा तलवार क्यूँ
खूब गुलदस्ता महकता रोज होगा जब नसीब
लोग क्या समझेंगे दिलवर पड़ रहा बीमार क्यूँ
आदमी की आदमी से बढ़ रही नफरत बहुत है
हम अगर डूबे तो डूबे पर दूजा हो उस पार क्यूँ
इश्क भी बदनाम है अब ये अश्क़ भी बदनाम हैं
जान लेकर सज रहा अब ये दर्द का बाजार क्यूँ
दास बचपन खो गया है बालिग़ हुआ है दुधमुहा
नेट पर खोया हुआ तौबा ऐसा खुला संसार क्यूँ. .


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







