हास्य -व्यंग
पोस्टर
डॉ. एच सी विपिन कुमार जैन "विख्यात"
कॉलेज की दीवार पर, एक छात्र ने पोस्टर लगाया,
अपनी खोई हुई 'अक्ल' का, हुलिया उसने बताया।
"गुमशुदा: मेरी अक्ल, जो एग्जाम हॉल में खो गई,
प्रश्न पत्र देखते ही, जो गहरी नींद में सो गई।"
पहचान: यह लॉजिक की बात पर चिढ़ जाती है,
पर रील बनाने के टाइम, रॉकेट बन जाती है।
हुलिया: यह 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी' की छात्रा है,
इसके ज्ञान की बस, रटने तक ही मात्रा है।
ढूंढने वाले को 'पासिंग मार्क्स' उधार दिए जाएंगे,
मेरे पिता के गुस्से से, उसे बचाए जाएंगे।
प्रोफेसर बोले— "बेटा, यह कभी तुम्हारे पास थी ही नहीं,
गुमशुदा उसे कहते हैं, जो कभी यहाँ रही सही।"
छात्र बोला— "सर, इंस्टाग्राम पर तो बहुत चलती थी,
सिर्फ आंसर-शीट देखकर, यह क्यों बदलती थी?"
दीवार पर लगा वो पोस्टर, हंसी का पात्र बन गया,
आज की पीढ़ी की शिक्षा का, वो मात्र यंत्र बन गया।
अक्ल गुमशुदा है, या गूगल में समा गई है,
कॉपी-पेस्ट की दुनिया में, वो कहीं चबा गई है।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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