हम भी उलझे हैं दवा में,
तुम भी उलझे हो दुआ में,
हम फिसले हैं जुबा से,
तुम भी निकले हो मकां से,
हमसे भी काग़ज़ ना छूटे,
तुम भी पकड़े हो सुरों को,
हम खोज में हैं खुदा कि,
ये दरबार किसलिए है,
तुम मिलना चाहते हो फ़ना से,
क्यूँ ये ओझल हो रही हैं,
दोनों ही अगर नहीं मिलते हैं,
तो शराबी आते हैं,
मयखाना बनाने।!!
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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