इन आंखों को अब, तुम्हें देखने का जी करता है,
अब कैसे कहूं, तुम्हें गले लगाने को दिल करता है,
बरसात की प्यारी सी झड़ी में,जानेमन दिल मचलता है,
आंखों से ये आंसु, छलक जाने को दिल करता है,
बहारों से बातें करके, बादल भी हमेशा लड़ता है,
तुम्हारी प्यारी सी आंखों में, डूब जाने को दिल करता है,
ये इश्क़ कैसा है, न होश और न ख्याल रखता है,
ख्वाबों में भी तुम्हें ही, निहारने को दिल करता है,
कैसे बताए तुम्हारे इस नाम को, अब सुप्रिया भी,
अब तेरी खुशबू में, जान लुटाने को दिल करता है...।।
- सुप्रिया साहू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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