पहली मुहब्बत नहीं हूँ मैं , तों वैसी शिद्दत कहाँ होगी
उसको मुहब्बत तों होगी पऱ वैसी इबादत कहाँ होगी
वो अब तलक ढूंढता फिरता हैं पहले के नक़्श-ए-पा
मुमकिन हैं कि दूसरी दफ़ा फिर उसे राहत कहाँ होगी
मुहब्बत में ज़हानत नहीं होती ये बस मुहब्बत होती हैं
अग़र ज़हानत हुई तों फिर उसमे अकीदत कहाँ होगी
माशूक पऱ कभी भी इल्जाम नहीं लगाते मुहब्बत में
वो ग़र मज़हबी ख़ुदा नहीं तों फिर उल्फत कहाँ होगी
लफ्ज़ो का ज़नाज़ा उठ गया आज़ मेरी जुबाँ सें जानाँ
ख़ामोशी इख़्तियार कर ली अब शिकायत कहाँ होगी
कृष्णा को यक़ी न हुआ तूने अचानक सें छिड़क दिया
शिकायत तों होगी पऱ पहले सी वो क़ुरबत कहाँ होगी
-कृष्णा शर्मा
नक़्श-ए-पा = पैरो के निशान, इख़्तियार = अपनाना
उल्फत = आत्मीयता, अकीदत = आदर भरा प्रेम,
क़ुरबत = समीपता


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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