भोर की पहली किरण संग,
वह जाग उठती है।
अपने सपनों से पहले,
घर सँवारती है।
चूल्हे की हर आँच में,
अपनापन पकता है।
उसके श्रम से ही,
हर आँगन महकता है।
बच्चों की मुस्कान में,
उसका संसार बसता है।
पति के हर संघर्ष में,
वह मौन संबल बनती है।
माँ-बाप का सम्मान,
संबंधों की मर्यादा।
सबको साथ रखती,
प्रेम की वह साधना।
थक जाती है फिर भी,
शिकवा नहीं करती।
कर्तव्य की राह से,
कभी नहीं मुड़ती।
घर की हर धड़कन में,
उसका समर्पण है।
हर छोटी उपलब्धि में,
उसका भी अर्पण है।
त्याग नहीं केवल,
उसकी पहचान बने।
उसके ज्ञान और साहस को,
सच्चा सम्मान मिले।
गृहिणी होना केवल,
घर तक सीमित होना नहीं।
वह परिवार की शक्ति है,
जीवन की उजली रोशनी।
उसके श्रम का मूल्य,
शब्दों से बड़ा होता है।
उसके प्रेम से ही,
हर घर, घर होता है।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







