पूर्णमासी की रात थी ,
पर छाया था अंधेरा ।
उम्मीद है हमें भी की ,
होगा नया सवेरा ।
हालात नाजुक हैं अभी ,
पर टूटी नहीं उम्मीद हमारी ।
निराश रजनी को लांघकर ,
होगा नया उजियारा ।।

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
पूर्णमासी की रात थी ,
पर छाया था अंधेरा ।
उम्मीद है हमें भी की ,
होगा नया सवेरा ।
हालात नाजुक हैं अभी ,
पर टूटी नहीं उम्मीद हमारी ।
निराश रजनी को लांघकर ,
होगा नया उजियारा ।।
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