घबरा कर पी गया
मर कर हजार बार, शरमा कर जी गया
जब प्यास लगी आँसू घबराकर पी गया
जीता, हूं या मरता हूं, मालूम नहीं मुझे
इश्क, के जहर को, सकुचा कर पी गया
मिलेगा ये तेरा प्यार, न जाने कब मुझे
अनदेखियों, में अपने, लबों को सी गया
तड़पाएगी मुझे कब तक, ये बेरुखी तेरी
मैं इसी उम्मीद में, डर-डर कर जी गया
कर ले रहम मुझ पर, या खुदा अब तो
गम कितने तेरे दर पर, आकर पी गया
कब, मिलेगी जन्नत, संग हूर के यादव
रोज इसी चाह में मर-मर कर जी गया
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







