सड़कों पर लहराता तिरंगा
केवल रंगों का मेल नहीं,
यह उन सपनों की परछाईं है
जो कभी भूख, भय और गुलामी से
आजादी तक चले थे।
गणतंत्र—
एक दिन नहीं,
हर दिन लिया गया वह संकल्प है
जहाँ सबसे कमजोर की आवाज़
सबसे ऊँचे मंच तक पहुँचती है।
यह संविधान
स्याही से नहीं,
बल्कि त्याग, संघर्ष
और असंख्य बलिदानों से लिखा गया है।
जब किसान खेत में पसीना बहाता है,
जब सैनिक सीमा पर रात जागता है,
जब शिक्षक दीपक बन अंधेरे से लड़ता है—
तभी यह गणतंत्र साँस लेता है।
आओ,
केवल सलामी न दें,
बल्कि जिम्मेदारी भी उठाएँ—
कि आज़ादी को
आदत नहीं,
आदर्श बनाएँ।
तिरंगे के नीचे
हम सब बराबर हैं—
यही गणतंत्र का सबसे सुंदर सत्य है।
जय हिन्द। जय भारत।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







