Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

ग़ायब लोग - आदर्श भूषण


हम अक्षर थे

मिटा दिए गए

क्योंकि लोकतांत्रिक दस्तावेज़

विकास की ओर बढ़ने के लिए

हमारा बोझ नहीं सह सकते थे

हम तब लिखे गए

जब जन गण मन लिखा जा रहा था

भाग्य विधाता दुर्भाग्यवश हमें भूल गया

हम संख्याएँ थे

जिन्हें तब गिना गया

जब कुछ लोग कम पड़ रहे थे

एक तानाशाह को

कुर्सी पर बिठाने को

बसों में भरे गए

रैलियों में ठेले गए

जोड़ा गया जब

सरकारी बाबू डकार रहे थे

घटाया गया जब

देश में निर्माण कार्य ज़ोरों पर था

हम जहाँ खड़े दिखे

अदना-सा मुँह लिए

जिन पर मानो एक साइन बोर्ड लगा हो :

“कार्य प्रगति पर है;

असुविधा के लिए खेद है”

हम खरपतवार थे

पूँजीवादी खलिहानों में

यूँ ही उग आए थे

हमारे लिए कीटनाशक बनाए गए

पचहत्तर योजनाएँ छिड़क-छिड़क कर मारा गया

हम फटे हुए नोट थे

चिपरे सिक्के थे

चले तो चले

वरना मंदिरों, मस्जिदों के

बाहर की दीवारों पर चमकते रहे

कटोरियों में खनकते रहे

हम थे कि नहीं थे

यह भी कहना मुश्किल है

हम पराई जगहें छोड़कर

अपनी जगहों के लिए निकले थे

पहले पौ फटी

फिर पैर फटे

फिर आँत फटी

और आख़िर में

ज़मीन फटी

हम आगे बढ़ाए गए

पिछड़े लोग थे

मसानों में ज़िंदा थे

काग़ज़ों पर ग़ायब।




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (3)

+

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' said

Bahut sundar rachna... Humare likhantu pariwar mein aapka bahut bahut sawagat hai sir ji.... Sadar pranam aapko

आदर्श भूषण replied

शुक्रिया रीना जी आभार आपका, आपकी दरियादिली और मंच पर स्वागत हेतु आपका तहे दिल से धन्यवाद है

पल्लवी श्रीवास्तव said

Vah vah

आदर्श भूषण replied

शुक्रिया पल्लवी जी आभार आपका

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

वाह क्या बात है 👌👌🙏🙏🙏 राजनीति पर गहरी चोट करती,कटू किंतु तार्किक सत्य,सत्ता के लोभी जनभावनाओं से सिर्फ खिलवाड़ करना अपना पुरूषार्थ समझते हैं। लाजवाब रचना।सादर अभिनन्दन 🙏🌹🙏🙏

आदर्श भूषण replied

आपका बहुत आभार श्रीमान जी

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