संघर्ष से हारी नहीं मै
हिम्मत से खड़ी हूँ मैं
सुबह से रात तक का सफर है
गहरी चोट को मरहम बना लूँगी मैं
कली से फूल तक का सफर है
कड़ी तूफान को भी परवाह नहीं करूँगी
गिरे पत्ते से पनपने पत्ते के सफर है
जितनी बार गिर जाए बार बार पल जाऊँगी
संघर्ष से हारी नहीं मैं
हिम्मत से खड़ी हूँ मैं ॥


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







