जानवर भी अपनी फितरत नही है बदलते
करो जो उन्हे मोहब्बत, मोहब्बत को भी है समझते।
इंसान तो कपडे की तरह फितरत है बदलते
चेहरे पर लगे नकाब रोज रोज है बदलते।
-राशिका

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
जानवर भी अपनी फितरत नही है बदलते
करो जो उन्हे मोहब्बत, मोहब्बत को भी है समझते।
इंसान तो कपडे की तरह फितरत है बदलते
चेहरे पर लगे नकाब रोज रोज है बदलते।
-राशिका
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