"ज्ञानदायिनी माँ सरस्वती"
वाणी में मधुरता, बुद्धि में उजियारा,
माँ का हर आशीष लगता है सहारा,
सरस्वती माँ बस इतना वरदान दे दो,
मेरी हर रचना बने सत्य का इशारा।
कलम से जो उतरे वो पावन विचार हो,
ज़ुबाँ पर सदा माँ का ही सत्कार हो,
जिस घर में वास करे वीणावालि सरस्वती,
उस घर में ज्ञान भी हो और संस्कार भी अपार हो ।
श्वेत कमल पर विराजे माँ की अद्भुत छवि,
ज्ञान का दीप जलाती है माँ सरस्वती,
जिसे छू ले उनकी कृपा की कोमल हवा,
उसका जीवन बन जाए एक पावन कविता।
वीणा की गूंज से भर जाए मन का जहान,
माँ की कृपा से मिट जाए हर अज्ञान,
जहाँ भी बरसे माँ सरस्वती की आशीर्वाद,
वहीं खिल उठता है ज्ञान का आसमान।
रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







