Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

उपहार के बदले उपहार - कमलकांत घिरी

“उपहार के बदले उपहार”
“क्या उपहार का भी कोई मोल चुकाया जा सकता है?
क्या उपहार का कोई विकल्प होता है?
क्या उपहार के बदले कोई उपहार देकर उस दिए हुए उपहार का भार उतारा जा सकता है?”
तो आखिर में इन सबका उत्तर आएगा— नहीं, क्योंकि मुझे ऐसा लगता है कि उपहार एक ऐसी अभिव्यक्ति है जो स्वयं में पूर्ण और शांत है; जिसे किसी को सौंपने से वह उपहार न तो आलोचना करता है और न ही प्रतिउत्तर देता है। आलोचना इस बात की नहीं करता कि उपहार किसी को किसी भी रूप में और किसी भी स्तर का दिया जा सकता है तथा प्रतिउत्तर भी इसलिए नहीं देता क्योंकि उपहार शांत है, वह उत्तर कैसे दे सकता है? उपहार तो एक नि:स्वार्थ भाव से दिए जाने वाली एक सुखद अभिव्यक्ति है, यदि इसका कोई प्रतिउत्तर आता है तो वह उपहार नहीं केवल वस्तु है।
उपहार जो अपने आप में एक सकारात्मक और सुखद अभिव्यक्ति का भाव है, यदि कोई व्यक्ति इस उपहार का मोल चुकाना भी चाहे तो वह इसका मोल चुकाने में असमर्थ रहेगा। ऐसा नहीं कि वह उस उपहार की मूल्य का मोल नहीं चुका सकता, यद्यपि बात ऐसी है कि उपहार अपने आप में पूर्ण है। हालांकि कोई उपहार किसी वस्तु का ही रूप होता है, किंतु जब उस वस्तु को उपहार के रूप में सजाकर किसी को भेंट दिया जाता है तो उस वस्तु का मूल्य उपहार में से अलग हो जाता है। तब उस वस्तु का कोई मूल्य ही नहीं रह जाता अर्थात अब वह वस्तु उपहार बनने के पश्चात अमूल्य हो जाता है जिसका मूल्य कोई चुका ही नहीं पाता है।
हालांकि व्यक्ति अपने अहंकारवश अथवा औपचारिकता निभाने के लिए अपने द्वारा प्राप्त उपहार की वस्तु का मूल्य आंक लेता है और अवसर आने पर उस अपने द्वारा प्राप्त उपहार की वस्तु के मूल्य को ध्यान में रखते हुए उसी मूल्य का अथवा उस वस्तु के मूल्य से कम या अधिक मूल्य की वस्तु सामने वाले व्यक्ति को प्रदान करता है और उन्हें लगता है कि उन्होंने अपने भूतकाल में प्राप्त उपहार का मोल आज चुका दिया, और स्वयं को उस उपहार के बोझ से मुक्त समझता है। किंतु ऐसा नहीं है..!
किसी को उपहार देते समय मन में यह भाव लाना कि "मैं अपने भूतकाल में प्राप्त उपहार का मोल इस उपहार को भेंट देकर चुका दूंगा", इस विचार के साथ यदि हम किसी को कोई भेंट दें भी दें तो वह भेंट उपहार की शक्ल में नहीं, यद्यपि किसी मूल्य से खरीदी गई वस्तु के रूप में सामने वाले तक पहुँचती है। तब वह भेंट उपहार नहीं बल्कि केवल एक वस्तु होती है और वह वस्तु अपने भीतर अपने मूल्य को भी समग्र रूप से धारण किए रहती है जिससे वस्तु का मूल्य स्पष्ट हो जाता है। यदि उपहार होता तो वस्तु का मूल्य कहीं दिखाई ही नहीं देता क्योंकि उपहार एक सुखद और सकारात्मक भाव की अभिव्यक्ति है जो मैंने पहले भी कहा है, और भाव दिखाई नहीं देता केवल महसूस किया जाता है।
सभी उपहार अपने आप में भिन्न होता है किंतु समान होता है। कहने का तात्पर्य यह है कि प्रत्येक व्यक्ति द्वारा प्रत्येक बार दिया जाने वाला उपहार स्वयं में भिन्न होता है और वह पूर्ण भी होता है। चूँकि वह उपहार वस्तु का ही रूप है तो वस्तु भिन्न प्रकार के तो हो ही सकते हैं, किंतु जब वह वस्तु किसी उपहार के रूप में भेंट की जाती है तो उस उपहार में से वस्तु का भी लोप हो जाता है और रह जाता है तो केवल कुछ देने का भाव। और यह भाव प्रत्येक उपहारदाता के मन में होता है और होना भी चाहिए, तभी आपकी भेंट सामने वाले तक उपहार के रूप में पहुँचेगी अन्यथा वह केवल वस्तु ही रह जाएगी। इस प्रकार प्रत्येक व्यक्ति द्वारा प्रदान किए जाने वाला उपहार एक समान होता है।
अतः अब से आप जब कभी भी किसी को उपहार दें तो यह ख्याल अवश्य ही अपने मन से निकाल दीजिएगा कि आप सामने वाले को अपने उपहार के बदले उपहार दे रहे हैं, क्योंकि किसी के उपहार का बदला आप चुका ही नहीं सकते। आप केवल दे सकते हैं और वो भी उनके सम्पूर्ण व समग्र रूप में नि:स्वार्थ भाव से। आपका उपहार व सामने वाले का उपहार सदैव अपनी आत्मा सहित एकल व भिन्न होती है जिसका कोई दूसरा विकल्प ही नहीं होता।”

@कमलकांत घिरी ✍️




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (3)

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तुलसी पटेल said

बस इसीलिए मैं आपको उपहार नहीं देती कमल जी..🤭। बहुत अच्छा लेख है👌🏻👏🏻

कमलकांत घिरी replied

🥲 मैंने उपहार न देने के लिए नहीं कहा मैंने उपहार को वस्तु के रूप में न देने को कहा खैर छोड़िए हमें आप जैसी दोस्त मिली है वही काफी है, हमें आपसे और कोई उपहार नहीं चाहिए😊✨

Lekhram Yadav said

उपहार और उसके महत्व को परिभाषित करती एक खूबसूरत रचना, आपको सादर नमस्कार।

कमलकांत घिरी replied

शुक्रिया सर जी 🙏 सादर प्रणाम स्वीकार करें 🙏

कृष्णा शर्मा said

👏👏👏
खूबसूरत रचना

कमलकांत घिरी replied

बहुत बहुत आभार सर जी 🙏

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