मैं कागज़ लिए हूँ हाथों में,
इसको मैं मोड़ना चाहता हूँ,
पर पहले लिखना चाहता हूँ,
ताकि तुम्हें दे सकूँ,
पर तुम पढ़ नहीं सकते,
जो मैंने लिखा है।
तुम हाथों में लिए हुए,
उस कागज के किनारे को,
जो तुम्हारी पकड़ में है,
फिर तुम उसको सीधा सपाट करते हुए,
एक नजरिए से और नज़र से शुरू करते हो,
थोड़ा समय लेते हुए,
कितनी देर में उस बात को समझते हो,
या उन शब्दों के बीच मुझे पढ़ते हुए,
बदले में क्या लिखते हो,
या सिर्फ पढ़कर बदलते हो।
सब इस तरह परिचय देते हैं,
जैसे उनके रंग उनकी वस्तुओं से पहले आते हैं,
फिर क्या करोगे मुझसे मिलकर,
या कर्म की तरह प्रेम की दिशा तय करोगे,
जो भी करना,
मुझे शामिल करना,
लेकिन चार तरह से,
एक मैं,
एक तुम,
एक हम दोनों के बाद,
एक जिसके लिए हम जुड़े,
लेकिन ये मुक्त है,
बीच में जो कुछ हुआ,
जो शामिल हुए,
वही जिस समय जहाँ जो कुछ हुआ। ।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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