किसी को खुशहाल देखकर
यह न समझ लेना
कि उसे दर्द का इल्म क्या होगा ।
वक्त किसी को नहीं बख्शता
कोई तप तप कर
सोने सा चमक उठता है,
तो कोई
सोने से खोटा हो जाता है।
सूरज जलकर ही
रोशनी बिखेरता है,
कभी देखा है
बिना आग जलाए
दिए को जलते हुए ?
किसी को दर्द में देखकर
उसे बेचारा मत समझ लेना,
हो सकता है,
वही उसका अंत हो,
किसी खूबसूरत
आरम्भ के लिए ।
जीवन है जनाब
जितना समझने की कोशिश करते हैं,
उतना ही
अपने में उलझाता जाता है ।
इसलिए
किसी के अंत पर हँसना नहीं,
और
किसी के आरम्भ पर जलना नहीं ।
वन्दना सूद
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







