हाँ पता है, कि हम मारे जाएंगे,
ख़ुद अपनी क़ब्र तक बेसहारे जाएंगे,
.
.
वो कंधे भी घर के ही होंगे चारों,
जिन पर रखकर फिर हम उतारे जाएंगे,
.
.
समंदर की पहुँच की औक़ात ही नहीं अब,
किसी गंदे सन्दे तालाब के किनारे जाएंगे,
.
.
कल का परचम तो मेरा अब तक ज़िंदा रहा,
कल क्या होगा, क्या हम पुकारे जाएंगे?
.
.
वो चीख़ना-चिल्लाना तो होगा ही, समझो,
मेरी मौत में झूठे नज़ारे आएंगे,
.
.
.
ध्यान रखना ये सब शेर हैं भूखे,
इमरती के लिए रुमाल पसारे जाएंगे,
.
.
अमा हमें क्या-किससे करना, क्या करना, क्यों करना,
आज हम जाते हैं, कल तुम्हारे जाएंगे....................
VIJAY VARSAAL....................


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







