शादी के नाम पर बेटी को बोझ समझा जाना,
न जान आजकल के माता-पिता को ऐसा क्यों लगता है,
हर माता-पिता की मजबूरी होती है बेटी की शादी करना,
आप भी दहेज नहीं बेटियों का सम्मान लीजिए उसकी मुस्कान में ही असली भगवान देख लीजिए..
यह सिर्फ नाम ऊंचा रखने के लिए लिया और दिया जाता है,
हां कुछ लड़के के घर वाले और लड़की के ससुराल वाले ऐसा करते हैं,
पहले बोलते हैं हमें कुछ नहीं चाहिए,
फिर ना जाने क्यों इस बहू को दहेज के लिए बार-बार प्रताड़ित किया जाता है..
लेकिन ऐसा करना किसी कानूनी अपराध या गुनाह से कम नहीं,
हालांकि हमें ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए क्योंकि,
आज आप किसी दूसरे की बेटी ब्याह,
कर अपने घर लाकर उसके साथ मार पीट करते हैं,
तो कल के दिन आपकी बेटी की भी साथ ऐसा हो सकता है..
आजकल के तो कुछ पढ़े-लिखे लोग भी दहेज लेना पसंद करते हैं,
हमें ऐसा कभी नहीं करना चाहिए क्योंकि,
जब एक बेटी के माता-पिता ने अपनी जान से ज्यादा कीमती चीज दी है,
जिसकी कीमत इस दहेज के सामने तो तो कुछ भी नहीं है...
कवि प्रशांत सोऊ जोधपुर राजस्थान


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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