कविता: दो जून की रोटी
दिनांक:02/06/2026
दो जून की रोटी मिलती रहे, कलयुग में कोई उपाय करो।
बच्चों को पोषण मिलता रहे, प्रभु जी कोई चमत्कार करो।
सरकारें निकम्मी हो गयी है, रोजगार का कोई इंतजाम करो।
शिक्षित अशिक्षित संस्कारी है,
प्रभु जी उन पर तो ध्यान धरो।
संस्कारी बालक तरस रहे है,
उनका तो आप संताप हरो।
निर्दयी व्यक्ति बरस रहे है,
उनका तो सत्यानाश करो।
आप में कितनी शक्ति है,
उसका तो इस्तेमाल करो।
जो प्रभु की भक्ति करता है,
उसका तो बेड़ा पार करो।
जो नालायक निकम्मा अपराधी है,
उस पर बिल्कुल ध्यान न धरो।
आपकी भक्ति में शक्ति है,
रोटी का तो इंतजाम करो।
संस्कारी अपराधी बन जाता है,
जब दो जून की रोटी का इंतजाम न हो।
आप करुणा के सागर है,
कोई तो ऐसा तो चमत्कार करो।
पाप अत्याचार बढ़ रहा है,
भारत को खुशहाल करो।
नारी की आबरू खतरे में है,
अब तो प्रभु जी ध्यान धरो।
दो जून की रोटी मिलती रहे,
कलयुग में कोई उपाय करो।
बच्चों को पोषण मिलता रहे,
प्रभु जी कोई चमत्कार करो।
सत्यवीर वैष्णव बारां राजस्थान 💞💞✒️💞💞


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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