● आसमान में उड़े रंग-बिरंग पतंग..
पतंग, पतंग, पतंग…
आसमान में उड़े रंग-बिरंग पतंग।
ये तेरी पतंग, ये मेरी पतंग,
हँसता-खेलता प्यारा सा ढंग।
हरे, नीले-पीले, लाल गुलाबी,
उड़ती जाए बन के रानी।
डोर पकड़ हम सभी को करें संग,
ऊँची-ऊँची उड़े पतंग।
जीतो-हारो कोई न रोए,
मिलकर खेलें, खुशियाँ बोए।
प्यार बाँटे हर इक रंग,
सबकी प्यारी एक सी पतंग।
आया संक्रांति का त्योहार,
प्यार भरा त्योहार,
उमंग से भरा त्योहार।
झूमो नाचो मौज मनाओ,
आया संक्रांति का त्योहार..
आया संक्रांति का त्योहार।
ये तेरी पतंग, ये मेरी पतंग,
आसमान में उड़े रंग-बिरंग पतंग।
आया संक्रांति का त्योहार।
खुशियाँ लिए हजार।
आसमान में उड़े रंग-बिरंग पतंग।
ये तेरी पतंग, ये मेरी पतंग,
आसमान में उड़े रंग-बिरंग पतंग।
कवि- डॉ.प्रदीपकुमार कळसकर-सर..✒️
जलगाँव, महाराष्ट्र


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