किताब का पन्ना अखिरकार खुल गया।
करीब दो महीने ग्रहण के बाद बोल गया।।
अब खुशियाँ ढूँढने की जरूरत नही मुझे।
उदास चेहरा आवाज सुनकर खिल गया।।
तरह-तरह की शक-सुआ के बादल छटे।
कड़वी यादे अधूरे किस्सो का कल गया।।
हर शख्स खराब नही उसका वक्त होता।
वक्त का पहिया घूमते दिल पिघल गया।।
मुकम्मल सवालों के जबाव तो नही मिले।
लुकाछिपी करता 'उपदेश' प्रेम मचल गया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







