जो चाहो वो मिलेगा, मगर कुछ टेढ़े रहिए..
वो आपकी जुबां कहेगा, मगर कुछ टेढ़े रहिए..।
आप तो हौले-हौले, फूंक मारते ही रहिए साहब..
मुद्दा-ए-दिल भी सुलगेगा, मगर कुछ टेढ़े रहिए..।
इस तरह न बार-बार, उनकी तरफ आँखें तरेरिए..
वो आपके अदब को उठेगा, मगर कुछ टेढ़े रहिए..।
माना ये आसमां है, अपनी परवाजों से कुछ परे..
कहीं तो यह भी झुकेगा, मगर कुछ टेढ़े रहिए..।
ज़रा सी बातों पर अब ये हाय-तौबा रहने भी दो..
ये दिल सब सह लेगा, मगर कुछ टेढ़े रहिए..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







