पानी जैसा साफ दिल कभी कसकता।
जब अस्तित्व पिघलता खून के घूंट पीता।।
सुस्ताने को मन करता अकेले बैठकर।
प्यारा करीबी रिश्ता भी बोझ सा लगता।।
समुन्दर के तट पाँव से रेत लिपट जाती।
पानी में उतरते सब कुछ विलीन लगता।।
मन की ईर्ष्या पी जाता जब कभी दरिया।
फिर दर्द दर्द नही रहता मन साफ लगता।।
मोहब्बत में घायल 'उपदेश' करता क्या।
मरूस्थल जमीन पर समुन्दर नही लगता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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