दिल का दर्द कैसे बयाँ करूँ,
अपने भी यहाँ बेगाने हैं।
जिसको अपना समझे थे हम,
वह चेहरे भी अब अंजाने हैं।
रातें चुपके आँसू पीतीं,
सपने भी टूटे अफ़साने हैं,
दिल का दर्द कैसे बयाँ करूँ,
अपने भी यहाँ बेगाने हैं।
जिस राह पे चाहत बोई थी,
वहाँ दर्द के जंगल उग आए।
जिन हाथों में दुनिया छोड़ी,
वह हाथ भी हमसे छूट जाए।
टूटी उम्मीदों की किरचें,
हर पल दिल को घायल करतीं,
हँसते चेहरों के पीछे कितनी
तन्हा साँसें आहें भरतीं।
अब किसको अपना कह दें हम,
सब रिश्ते झूठे फ़साने हैं,
दिल का दर्द कैसे बयाँ करूँ,
अपने भी यहाँ बेगाने हैं।
आईना भी अब डरता है,
चेहरे पर सवाल सजाए।
भीड़ बहुत है इस दुनिया में,
फिर भी दिल क्यों तन्हा जाए।
कुछ यादें चुपके रोती हैं,
कुछ ज़ख्म अभी भी जागे हैं,
जो बातें दिल में दफ़्न रहीं,
वह अश्क बनाकर भागे हैं।
हम दर्द लिखें या ग़म लिखें,
अल्फ़ाज़ सभी वीराने हैं,
दिल का दर्द कैसे बयाँ करूँ,
अपने भी यहाँ बेगाने हैं।
एक दीप जला था उम्मीदों का,
वह आँधी में बुझता जाता है।
हर रिश्ता इस मतलब वाली,
दुनिया में बदलता जाता है।
फिर भी दिल ये दुआ करे,
कोई यूँ तन्हा ना रोए,
जो दर्द मिला इस जीवन में,
वह दर्द किसी का ना होए।
हम ख़ुद से बातें करते हैं,
जब सारे लोग अंजाने हैं,
दिल का दर्द कैसे बयाँ करूँ,
अपने भी यहाँ बेगाने हैं।
दिल की धड़कन ये कहती है,
दर्द ही अब हमसाया है।
कुछ ख़्वाब अभी भी ज़िंदा हैं,
कुछ ग़म ने दिल बहलाया है।
दिल का दर्द कैसे बयाँ करूँ…
अपने भी यहाँ बेगाने हैं…
डॉ अखिलेश श्रीवास्तव


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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