फूलों सा उसका हंसना
कलियों सा मुस्कराना
कुदरत की खूबसूरत
ले आयी है नजराना।
झरनों से मीठी मीठी
लगती है उसकी बोली
दिखती है बड़ी प्यारी
गुस्से में तमतमाना।
आंखों में झिलमिलाती
है स्वर्ण किरण आभा
चंदा की मखमली सा
स्पर्श है खजाना।
आंगन में गूंजती है
इक गूंज मौसिकी का
तन मन को है नचवाती
घुंघरू का छनछनाना।
हमारी " अग्निवर्णा" है
घर की जीवन रेखा
बुलबुल की गीत सुनने
मेरे घर चले आना।
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







