आप ही समझ जाते तो ये गिला न होता,
कोई अपने ही आशियाने में गुमशुदा न होता।
बैठकर तन्हाई के घूंट पी जाते तो ये नशा न होता,
आँखों से ही दिख जाते तो मोहब्बत में फ़ना न होता।
तुम्हारी भी एक खुली चाह है ये जानते हैं तुम्हारे ही बस दोस्त रह जाते तो ये खता का दीवाना न होता,
इश्क़ तो रह जाता है काफिरों तो ये आशिक़ी में आँसू के दीये जलाना न होता।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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