आवाज़ क़ो तरस जाओगे ये तुम्हें नसीब न होंगी
पहले की तरह हमारी साँसे फिर क़रीब न होंगी
कुछ लम्हें उधार मांग लूँ तों क्या दे पाओगे हमें
जानते हैं फिर कभी हमकों राहत-नसीब न होंगी
ज़िस्त की भट्टी में ख़्वाब-ऐ-इश्क़ ख़ाक हुआ
सोचा न था दर्दी क़ो इतनी भी तहज़ीब न होंगी
रोये बहुत इस अंजाम की ख़बर होते हुए जानाँ
ऐसे यूँ अंजाम सें निकलने की तरकीब न होंगी
अंजाम की ख़बर थी फिर भी दिल धड़कने दिया
कृष्णा की तरह किसी की किस्मत ग़रीब न होंगी
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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