तुझे न देखूं तो दिल मचलता है,
आंखों में नींद नहीं होती,
रात-रातभर करवट बदलता है,
यूँ शरारत भरी नजरों न देखा करो,
जब मैं होती हूं तुम्हारे साथ,
तब ये श्रृंगार भी फीका लगता है...।।
शाम ढलती रही तेरे एतबार में,
इश्क़ की बुखार चढ़ने लगता है,
चोरी-चोरी ही सही तेरे संग पहली बार मंदिर जाना,
भगवान का दिया हुआ आशीर्वाद सा लगता है...।।
कुछ मांगू भी तो क्या मांगू भगवान से,
जो दिया उसने वो अपना ही लगता है,
बंध जाऊं बंधन में तो तुम्हारे साथ ही,
तुम्हारे साथ चलके हर पल सुकून सा लगता है...।।
- सुप्रिया साहू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







