रिमझिम सावन धीरे-धीरे, धरा गगन को चूम रहा,
प्रेम-सुधा की मधुर सरिता, हर आँगन में घूम रहा।
बादल की मृदु श्याम चुनरिया, नभ के तन पर छाई है,
प्रिय के संग प्रियतम की धड़कन, आज स्वयं मुस्काई है।
भीगी पगडंडी पर दोनों, थामे एक-दूजे का हाथ,
मानो चुपके प्रेम लिख रहा, अपने मन की हर सौगात।
बूँद-बूँद मोती बनकर जब, केशों में ठहर जाती है,
लज्जा बन अधरों की रेखा, मुस्कानों में ढल जाती है।
पवन सुनाए मधुर तराने, पत्ते ताली बजते हैं,
दोनों के मन के उपवन में, नव अनुराग सजते हैं।
नयनों की निःशब्द भाषा में, स्नेह स्वयं मुस्काता है,
हर धड़कन के कोमल स्वर में, प्रेम-दीप जगमगाता है।
मेघ मल्हारों की लय पर, मन वीणा झंकृत होती,
एक छतरी के नीचे जैसे, जीवन-डोरी और पिरोती।
चूड़ी की मधुरिम खनखन में, पायल राग सुनाती है,
बरखा की हर शीतल बूँदें, प्रीति-पुष्प बरसाती हैं।
नदिया, वन, उपवन सब जैसे, उनके संग मुस्काते हैं,
भीगे क्षण के अनुपम मोती, जीवन भर मुस्काते हैं।
न तन की चाह, न वैभव की, केवल निर्मल मन का मान,
सच्चा प्रेम वही कहलाता, जिसमें हो विश्वास महान।
सावन का यह शुभ आलिंगन, युग-युग तक संदेश कहे—
प्रेम जहाँ निष्कलुष खिलता है, ईश्वर वहीं सदैव रहे।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







