Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

बरखा

रिमझिम सावन धीरे-धीरे, धरा गगन को चूम रहा,
प्रेम-सुधा की मधुर सरिता, हर आँगन में घूम रहा।

बादल की मृदु श्याम चुनरिया, नभ के तन पर छाई है,
प्रिय के संग प्रियतम की धड़कन, आज स्वयं मुस्काई है।

भीगी पगडंडी पर दोनों, थामे एक-दूजे का हाथ,
मानो चुपके प्रेम लिख रहा, अपने मन की हर सौगात।

बूँद-बूँद मोती बनकर जब, केशों में ठहर जाती है,
लज्जा बन अधरों की रेखा, मुस्कानों में ढल जाती है।

पवन सुनाए मधुर तराने, पत्ते ताली बजते हैं,
दोनों के मन के उपवन में, नव अनुराग सजते हैं।

नयनों की निःशब्द भाषा में, स्नेह स्वयं मुस्काता है,
हर धड़कन के कोमल स्वर में, प्रेम-दीप जगमगाता है।

मेघ मल्हारों की लय पर, मन वीणा झंकृत होती,
एक छतरी के नीचे जैसे, जीवन-डोरी और पिरोती।

चूड़ी की मधुरिम खनखन में, पायल राग सुनाती है,
बरखा की हर शीतल बूँदें, प्रीति-पुष्प बरसाती हैं।

नदिया, वन, उपवन सब जैसे, उनके संग मुस्काते हैं,
भीगे क्षण के अनुपम मोती, जीवन भर मुस्काते हैं।

न तन की चाह, न वैभव की, केवल निर्मल मन का मान,
सच्चा प्रेम वही कहलाता, जिसमें हो विश्वास महान।

सावन का यह शुभ आलिंगन, युग-युग तक संदेश कहे—
प्रेम जहाँ निष्कलुष खिलता है, ईश्वर वहीं सदैव रहे।




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (6)

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आदर्श भूषण said

आपने सावन, प्रकृति और निष्कलुष प्रेम का ऐसा मनोहारी समन्वय रचा है कि प्रत्येक पद पाठक के हृदय में मधुर मल्हार-सा गूंज उठता है।

आदित्य शेखर 'अनुगूँज' replied

आपकी प्रतिक्रिया अत्यंत प्रेरणादायी है

उपदेश कुमार शाक्यावार said

हृदय स्पर्शी रचना

आदित्य शेखर 'अनुगूँज' replied

आपकी प्रतिक्रिया अत्यंत प्रेरणादायी है

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' said

वाह एक एक लफ़्ज़ दिल को छू गया.... पूरा दृश्य सामने नज़र आने लगा... बहुत खूबसूरत रचना... आपको और आपकी लेखनी को सादर प्रणाम 🙏🙏

आदित्य शेखर 'अनुगूँज' replied

आपकी प्रतिक्रिया अत्यंत प्रेरणादायी है

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

रिमझिम सावन की पावन बूंदों में शब्दों की मिश्री घोलकर, प्रेम और प्रकृति सौंदर्य को लपेटकर जो गीतमय रचना प्रस्तुत किया है आपने, वाकई दिल को झूमने पर विवश कर दिया। अतिसुंदर अतिसुंदर अतिसुंदर रचना 👌🌹🙏🙏

आदित्य शेखर 'अनुगूँज' replied

आपकी प्रतिक्रिया अत्यंत प्रेरणादायी है

सुभाष कुमार यादव said

बहुत सुंदर रचना। आपकी रचना पढ़कर मन झूम उठा।👌

आदित्य शेखर 'अनुगूँज' replied

आपकी प्रतिक्रिया अत्यंत प्रेरणादायी है

सुप्रिया साहू said

वाह वाह....हर शब्द दिल में उतरते ही दिल में जगह बनकर बैठ गई, सावन की रिमझिम बूंदों ने हृदय में मिठास घोल दी, प्रकृति का सुंदरता बहुत खूबसूरत वर्णन, बहुत खूबसूरत रचना आदित्य सर 👌👌, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

आदित्य शेखर 'अनुगूँज' replied

आपकी प्रतिक्रिया अत्यंत प्रेरणादायी है

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