उनको याद करने का भी वक़्त निकल नहीं रहा..
दिल ने खाई ठोकर ऐसी, कि सम्भल नहीं रहा..।
इस ज़हाँ में देखा, हर महफ़िल में जाकर हमने..
किसी शय से भी दिल मेरा, बहल नहीं रहा..।
बहुत मुद्दत से इन्तेज़ार था, मुझे हुस्न-ए-यार का..
रातें भी शबाब पे थी, मगर चांद कभी मुकम्मल नहीं रहा..।
बहारों की ख़बर हैं, फ़जाओं में हर-सू मगर..
मेरी ज़िंदगी में खिज़ाओं का मौसम, बदल नहीं रहा..।
अश्क बहाकर मना लेते थे, दिल-ए-बेचैन को हम..
अब जाने क्यूँ, इसमें ज़िगर-ए-लहू का भी दख़ल नहीं रहा..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







