जागो नाथ जागो,
लाठी पड़ी है,
धरना हुआ है,
आँखों से आँसू छीने गए हैं,
खून बहा है,
धड़ जो फटे हैं,
शक्ति का नग्न खेल हुआ है,
कौन थे वो जो,
बिना नाम के थे,
बिना वर्दी के थे,
पूरी शक्ति से,
शिक्षा का कत्ल हुआ है,
जागो नाथ जागो,
मालिक है जो कि,
चुप रहता है,
संवेदनहीनता में क्यूँ रहता है,
कितना मूर्ख है ये,
लोगों से छुपता है,
कर्म इसका भी लौट कर आएगा,
तब ये खुद को बेसहारा पाएगा,
धर्म को इसने यूँ मरोड़ा,
पाप को भी इसने पुण्य कहा है,
इसके दिन अब उल्टे गिनो तुम,
बचकर ये कहाँ तक जाएगा,
बचकर ये कहाँ तक जाएगा।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







