अश्क बहे तो बहने दो
दर्द सागर से आए निकलने दो
मन की व्यथा से उभरे उभरने दो
पल दो पल के लिए बहनें दो
अश्क बहे तो बहने दो...
सब्र शिला भेद है आए आने दो
सुकून की सांस उसे लेने दो
अपनी पहचान करने दो
मिला किनारा तो छाने दो
अश्क बहे तो बहने दो ...
बेहद घायल थे तभी तो आए आने दो
छुओ बड़े प्यार से प्यास बुझाने दो
ओस के मोती जैसे चमकने दो
है थोड़ा खारा पर मिठास भरने दो
अश्क बहे तो बहने दो ...!!!!


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







