आज असत्य बोलकर, अट्टहास लगा रहा है।
बेईमानों की बस्ती में, चूहा नाच रहा है।
अपने-अपने कर्मों का, फल भोगना ही पड़ेगा।
भ्रष्टाचारियों को,न्याय का पाठ पढ़ाना ही होगा।
छल कपट करके, भेष बदल बदल कर।
माला लिए हाथ में,कब तक तू जी पाएगा।

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
आज असत्य बोलकर, अट्टहास लगा रहा है।
बेईमानों की बस्ती में, चूहा नाच रहा है।
अपने-अपने कर्मों का, फल भोगना ही पड़ेगा।
भ्रष्टाचारियों को,न्याय का पाठ पढ़ाना ही होगा।
छल कपट करके, भेष बदल बदल कर।
माला लिए हाथ में,कब तक तू जी पाएगा।
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