कभी छोटी सी भी मदद ना लेना किसी से,
वरना ज़िन्दगी भर ये बोझ ढोना पड़ेगा।
कभी कर ना पाए मजबूरी में मदद उसकी,
तो तानों का तीर सीने पर झेलना पड़ेगा।
कभी किसी से माॅंगी एक मदद के बदले,
तुम्हें ज़िंदगी भर बहुत कुछ खोना पड़ेगा।
जितना हो खुद ही खुद की मदद कर लेना,
किसी ओर की मदद से गुलाम बनना पड़ेगा।
✍️ रीना कुमारी प्रजापत ✍️
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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