अजब करिश्मा है मेरी मां का
ये मेरी मां को पता नहीं है
मिला नहीं हूं कभी खुदा से
मेरी नज़र में खुदा वही है
वो अपनी सांसों से लड़ झगड़कर
जनी है मुझको तड़प तड़प कर
मुझे जनम दे वो इतनी खुश थी
जैसे कि कुछ भी हुआ नहीं है
ग़ज़ल कविता कला विधाएं
सभी के मन पर असर दिखाएं
है मां की लोरी में इतनी शक्ति
जहां में ऐसी कला नहीं है
लगी बीमारी पड़े पलंग पर
रोटी से नफ़रत पानी से नफ़रत
डपट डपट कर है मां खिलाती
किसी में हिम्मत अदा नहीं है
जो कामयाबी मिली है तुमको
उड़े धरा से गगन गगन में
है मां की आंखों से छलके मोती
समझ लो धरती नहा रही है
सारे जहां में भरी दवाएं
शरीर मन से दरद मिटाएं
हमारे जीवन के हर मरज में
ममता से अच्छी दवा नहीं है।।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







